Ganesh Ji Aarti PDF | गणपती आरती संग्रह PDF हिंदी में

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अगर आप भगवान Ganesh Ji Aarti PDF ( गणेश जी की आरती की पीडीएफ ) फाइल डाउनलोड करना चाहते हैं तो आप बिल्कुल सही जगह आए हैं| हम आपको गणेश जी की आरती की पीडीएफ फाइल के साथ-साथ गणेश जी के बारे में कुछ ऐसी जानकारी बताएँगे जो आपको अवश्य ही अच्छी लगेगी.

भगवान गणेश का नाम सुनते ही हमारे मन में खुशियों का खजाना खुल जाता है। वे हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता हैं, जिन्हें सबसे पहले पूजा जाता है। गणेश जी को ‘विघ्नहर्ता’ भी कहा जाता है, क्योंकि वे हर बाधा को दूर करने वाले माने जाते हैं।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश जी प्रथम पूज्य भी माना जाता है| गणपति को सर्वश्रेष्ठ ज्ञानी, समर्थ, और विनायक माना जाता है। उनकी विशेषता है कि वे सभी के मन के बिना विचार करते हैं और हर मनोकामना को पूरा करते हैं।

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PDF NameGanesh Ji Aarti PDF
No. of Pages4
PDF Size496 KB
LanguageHindi
Provideraartichalisapdf.com

श्री गणपति आरती संग्रह (Ganpati Aarti Lyrics)

भगवान गणेश की कई आरतियाँ है जो कि कई भारतीय भाषाओ में की जाती है| हमने आपके लिए भगवान गणेश की मुख्य आरतियों के बोल नीचे लिख दिए हैं जिन्हें आप पढ सकते हैं साथ ही इनकी PDF फाइल भी डाउनलोड कर सकते हैं| PDF फाइल में भी आप भगवान गणेश की इन सभी मुख्य आरतियों को आप पढ़ सकते हैं|

( 1 ) जय गणेश देवा

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

“बोलो गणपति बाप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया”

( 2 ) सुखकर्ता दुखहर्ता

सुखकर्ता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नांची।
नुरवी; पुरवी प्रेम, कृपा जयाची।
सर्वांगी सुंदर, उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ, मुक्ताफळांची॥१॥
जय देव, जय देव जय मंगलमूर्ती।

दर्शनमात्रे मन कामना पुरती ॥धृ॥
रत्नखचित फरा, तुज गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी , कुमकुम केशरा।
हिरेजडित मुकुट, शोभतो बरा ।
रुणझुणती नूपुरे, चरणी घागरिया।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ॥२॥

लंबोदर पीतांबर, फणिवरबंधना ।
सरळ सोंड, वक्रतुंड त्रिनयना।
दास रामाचा, वाट पाहे सदना।
संकटी पावावे, निर्वाणी रक्षावे, सुरवरवंदना।
जय देव जय देव, जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥३॥

(3) जय देव जय मंगलमूर्ती

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ।
तुझे गुण वर्णाया मज कैंची स्फूर्ती ॥ ध्रु० ॥

नानापरिमळ दूर्वा शमिपत्रें ।
लाडू मोदक अन्नें परिपूरित पातें ।

ऐसें पूजन केल्या बीजाक्षरमंत्रें ।
अष्टहि सिद्धी नवनिधि देसी क्षणमात्रें ॥१॥

तुझे ध्यान निरंतर जे कोणी करिती ।
त्यांची सकलहि पापें विघ्नेंही हरती ॥

वाजी वारण शिबिका सेवक सुत युवती ।
सर्वहि पावुनि अंती भवसागर तरती ॥ जय देव० ॥ २ ॥

शरणागत सर्वस्वे भजती तव चरणीं ।
कीर्ति तयांची राहे जोंवर शाशितरणी ॥

त्रैयोक्यों ते विजयी अद्भुत हे करणी ।
गोसावीनंदन रत नामस्मरणीम ॥ जय देव जय देव० ॥३॥

(4) एकदंताय वक्रतुण्डय आरती

गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि ।
गुणशरीराय गुणमण्डिताय गुणेशानाय धीमहि ।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि ।
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि ।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि ॥


गानचतुराय गानप्राणाय गानान्तरात्मने ।
गानोत्सुकाय गानमत्ताय गानोत्सुकमनसे ।
गुरुपूजिताय गुरुदेवताय गुरुकुलस्थायिने ।
गुरुविक्रमाय गुह्यप्रवराय गुरवे गुणगुरवे ।
गुरुदैत्यगलच्छेत्रे गुरुधर्मसदाराध्याय ।
गुरुपुत्रपरित्रात्रे गुरुपाखण्डखण्डकाय ।


गीतसाराय गीततत्त्वाय गीतगोत्राय धीमहि ।
गूढगुल्फाय गन्धमत्ताय गोजयप्रदाय धीमहि ।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि ।
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि ।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि ॥


ग्रन्थगीताय ग्रन्थगेयाय ग्रन्थान्तरात्मने ।
गीतलीनाय गीताश्रयाय गीतवाद्यपटवे ।
गेयचरिताय गायकवराय गन्धर्वप्रियकृते ।
गायकाधीनविग्रहाय गङ्गाजलप्रणयवते ।
गौरीस्तनन्धयाय गौरीहृदयनन्दनाय ।
गौरभानुसुताय गौरीगणेश्वराय ।


गौरीप्रणयाय गौरीप्रवणाय गौरभावाय धीमहि ।
गोसहस्राय गोवर्धनाय गोपगोपाय धीमहि ।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि ।
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि ।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि ॥

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