Gayatri Chalisa Pdf – श्री गायत्री चालीसा

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गायत्री चालीसा का हिन्दू धर्मं में विशेष महत्व है। गायत्री चालीसा एक ऐसी अनमोल रचना है जो ध्यान और आध्यात्मिक साधना को समर्पित है, और इसे गायत्री माता की पूजा में विशेष महत्ता दी जाती है।

गायत्री चालीसा वेदों में मान्यता प्राप्त मंत्रों में से एक है। इस चालीसा में सूर्य भगवान की पूजा और स्तुति की गई है। गायत्री माता को सूर्यपुत्री माना जाता है और उनकी चालीसा का पाठ करने से श्रद्धालुओं को आत्मिक शक्ति, ध्यान की ऊर्जा, और सकारात्मकता मिलती है।

गायत्री चालीसा में सूर्य की महिमा और उसकी शक्ति का वर्णन किया गया है। प्रतिदिन गायत्री चालीसा के पाठ से मानव जीवन में सकारात्मकता, शांति, और आनंद का अनुभव होता है।

गायत्री चालीसा का नियमित पाठ करने से मानसिक और आध्यात्मिक विकास होता है। यह चालीसा मानव जीवन को संतुलित बनाने में सहायता करती है और चिंता, दुःख, और असमंजस्यता का सामना करने की क्षमता प्रदान करती है।

Gayatri Chalisa Pdf
PDF NameGayatri Chalisa Pdf
No. of Pages5
PDF Size735 KB
LanguageHindi
Provideraartichalisapdf.com
CategoryReligion & Spirituality

श्री गायत्री चालीसा – Gayatri Chalisa Lyrics

॥ दोहा ॥

हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड ।
शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड ॥
जगत जननि, मंगल करनि, गायत्री सुखधाम ।
प्रणवों सावित्री, स्वधा, स्वाहा पूरन काम ॥

॥ चौपाई ॥

भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी ।
गायत्री नित कलिमल दहनी ॥

अक्षर चौबिस परम पुनीता ।
इनमें बसें शास्त्र, श्रुति, गीता ॥
शाश्वत सतोगुणी सतरुपा ।
सत्य सनातन सुधा अनूपा ॥

हंसारुढ़ सितम्बर धारी ।
स्वर्णकांति शुचि गगन बिहारी ॥
पुस्तक पुष्प कमंडलु माला ।
शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला ॥

ध्यान धरत पुलकित हिय होई ।
सुख उपजत, दुःख दुरमति खोई ॥
कामधेनु तुम सुर तरु छाया ।
निराकार की अदभुत माया ॥

तुम्हरी शरण गहै जो कोई ।
तरै सकल संकट सों सोई ॥
सरस्वती लक्ष्मी तुम काली ।
दिपै तुम्हारी ज्योति निराली ॥

तुम्हरी महिमा पारन पावें ।
जो शारद शत मुख गुण गावें ॥
चार वेद की मातु पुनीता ।
तुम ब्रहमाणी गौरी सीता ॥

महामंत्र जितने जग माहीं ।
कोऊ गायत्री सम नाहीं ॥
सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै ।
आलस पाप अविघा नासै ॥

सृष्टि बीज जग जननि भवानी ।
काल रात्रि वरदा कल्यानी ॥
ब्रहमा विष्णु रुद्र सुर जेते ।
तुम सों पावें सुरता तेते ॥

तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे ।
जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे ॥
महिमा अपरम्पार तुम्हारी ।
जै जै जै त्रिपदा भय हारी ॥

पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना ।
तुम सम अधिक न जग में आना ॥
तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा ।
तुमहिं पाय कछु रहै न क्लेषा ॥

जानत तुमहिं, तुमहिं है जाई ।
पारस परसि कुधातु सुहाई ॥
तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई ।
माता तुम सब ठौर समाई ॥

ग्रह नक्षत्र ब्रहमाण्ड घनेरे ।
सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे ॥
सकलसृष्टि की प्राण विधाता ।
पालक पोषक नाशक त्राता ॥

मातेश्वरी दया व्रत धारी ।
तुम सन तरे पतकी भारी ॥
जापर कृपा तुम्हारी होई ।
तापर कृपा करें सब कोई ॥

मंद बुद्घि ते बुधि बल पावें ।
रोगी रोग रहित है जावें ॥
दारिद मिटै कटै सब पीरा ।
नाशै दुःख हरै भव भीरा ॥

गृह कलेश चित चिंता भारी ।
नासै गायत्री भय हारी ॥
संतिति हीन सुसंतति पावें ।
सुख संपत्ति युत मोद मनावें ॥

भूत पिशाच सबै भय खावें ।
यम के दूत निकट नहिं आवें ॥
जो सधवा सुमिरें चित लाई ।
अछत सुहाग सदा सुखदाई ॥

घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी ।
विधवा रहें सत्य व्रत धारी ॥
जयति जयति जगदम्ब भवानी ।
तुम सम और दयालु न दानी ॥

जो सदगुरु सों दीक्षा पावें ।
सो साधन को सफल बनावें ॥

सुमिरन करें सुरुचि बड़भागी ।
लहैं मनोरथ गृही विरागी ॥
अष्ट सिद्घि नवनिधि की दाता ।
सब समर्थ गायत्री माता ॥

ऋषि, मुनि, यती, तपस्वी, जोगी ।
आरत, अर्थी, चिंतित, भोगी ॥
जो जो शरण तुम्हारी आवें ।
सो सो मन वांछित फल पावें ॥

बल, बुद्घि, विघा, शील स्वभाऊ ।
धन वैभव यश तेज उछाऊ ॥
सकल बढ़ें उपजे सुख नाना ।
जो यह पाठ करै धरि ध्याना ॥

॥ दोहा ॥

यह चालीसा भक्तियुत, पाठ करे जो कोय ।
तापर कृपा प्रसन्नता, गायत्री की होय ॥


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गायत्री चालीसा पाठ के फायदे

गायत्री चालीसा माँ गायत्री को समर्पित है, इसके पाठ से हमारी मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है। गायत्री चालीसा का पाठ करने के निम्न फायदे होते है।

  1. चिंता मुक्ति: गायत्री चालीसा पढ़ने से मन में चिंताओं का सामना करना आसान होता है और हमारी मानसिक शांति बढ़ती है।
  2. आध्यात्मिक विकास: रोज़ गायत्री चालीसा का पाठ करने से हमारा आध्यात्मिक विकास होता है। यह हमें सही राह दिखाती है और उच्च मानवीय मूल्यों को समझाती है।
  3. स्वास्थ्य में सुधार: इस चालीसा को नियमित पढ़ने से हमारा शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है, जो हमें बीमारियों से बचाता है और अच्छे स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
  4. शुभ फलों की प्राप्ति: गायत्री चालीसा पढ़ने से हमारे जीवन में सकारात्मक परिणाम होते हैं, जैसे संकटों से मुक्ति, सफलता, धन की प्राप्ति और अच्छी सम्पत्ति।
  5. आत्मा का समर्पण: गायत्री चालीसा पढ़ने से हमारी भावनाएँ शुद्ध होती हैं और हम भगवान् के सामने अपनी आत्मा को समर्पित करते हैं।

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