Shani Aarti Pdf – श्री शनिदेव जी की आरती 

Shani Aarti Pdf । श्री शनिदेव जी की आरती । शनिदेव आरती (हिन्दी)। श्री शनिदेव आरती। Shani Aarti Hindi। Shri Shani Dev ji ki Aarti। Shani Dev Aarti Lyrics

भारतीय संस्कृति में भगवान शनि को अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है। वे धर्म, न्याय, और निष्ठा के प्रतीक माने जाते हैं। शनि ग्रह को सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली ग्रहों में से एक माना जाता है।

शनि देव का प्रभाव सभी राशियों और जातकों पर असर डालता है। शनि देव अच्छे कर्मों को प्रोत्साहित करते हैं और बुराई को दंडित करते हैं।

भगवान शनि की आरती और पूजा करने से मनुष्य को कठिनाइयों से निपटने की शक्ति प्राप्त होती है। शनि भगवान की कृपा से अन्धकार को दूर किया जा सकता है और जीवन सफलता की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।

शनि की कथाएं और महत्त्व विशेषकर हिंदू धर्म में व्यापक रूप से प्रचलित हैं। उनका वाहन क्रौंच पक्षी है और उन्हें कालभैरव का स्वरूप माना जाता है। शनि की पूजा का विशेष महत्त्व सोमवार को होता है।

शनि भगवान की कृपा और आशीर्वाद से व्यक्ति को उनकी धर्मनिष्ठा, त्याग, और संघर्ष की ओर ले जाया जा सकता है। उनकी पूजा से व्यक्ति को धैर्य, सहनशीलता, और सच्चाई की ओर बढ़ने की शक्ति मिलती है।

PDF NameShani Aarti Pdf
No. of Pages264 KB
PDF Size1
LanguageHindi
Provideraartichalisapdf.com
CategoryReligion & Spirituality

शनि देव जी की आरती – Shani Aarti Hindi Lyrics

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥

श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥

क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी ।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥

देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी ।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥


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