Shiv Aarti Pdf In Hindi – श्री शिवजी की आरती

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शिवजी हिंदू धर्म के महादेव और त्रिदेवों में से एक हैं। वे सृष्टि के निर्माता, संहारक और पालनहार के रूप में पूजे जाते हैं। भगवान शिव का ध्यान करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति मिलती है।

शिवजी शर्प और त्रिशूल धारण करते हुए विराजमान रहते हैं। शिवजी को ‘महाकाल’ के नाम से भी जाना जाता है, जो समय और मृत्यु का प्रतीक है।

भगवान शिव के भक्त बेहद श्रद्धा और समर्पण के साथ पूजते हैं। शिवरात्रि जैसे त्योहार पर उनकी विशेष पूजा और अर्चना की जाती है। भगवान शिव को गंगा, चंद्रमा, सर्प और भूत-प्रेतों का स्वामी माना जाता है।

शिवजी के ध्यान में लगने से मानव जीवन में शांति, समृद्धि और आनंद की प्राप्ति होती है। उनकी पूजा से हमें संतुलन, धैर्य और सहनशीलता की सीख मिलती है।

शिवजी हिंदू धर्म में एक महान और प्रिय देवता हैं, जो शक्ति, साहस, और ध्यान का प्रतीक हैं। उनकी पूजा से ही व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति पा सकता है।

हम आपको शिवजी की आरती की Pdf फाइल इस आर्टिकल के माध्यम से उपलब्द कराएँगे। इसे आप फ्री में डाउनलोड करके कभी भी इसका उपयोग कर सकते है।


PDF NameShiv Aarti Pdf
No. of Pages2
PDF Size273 KB
LanguageHindi
Provideraartichalisapdf.com
CategoryReligion & Spirituality

श्री शिवजी की आरती – Shiv Aarti Lyrics

जय शिव ओंकारा प्रभु ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा …॥

एकानन चतुरानन पंचांनन राजे स्वामी पंचांनन राजे
हंसानन गरुड़ासन हंसानन गरुड़ासन
वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा …॥

दो भुज चारु चतुर्भूज दश भुज ते सोहें स्वामी दश भुज ते सोहें
तीनों रूप निरखता तीनों रूप निरखता
त्रिभुवन जन मोहें ॥ ॐ जय शिव ओंकारा …॥

अक्षमाला बनमाला मुंडमालाधारी स्वामी मुंडमालाधारी
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥ॐ जय शिव ओंकारा …॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगें स्वामी बाघाम्बर अंगें
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे || ॐ जय शिव ओंकारा …॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता स्वामी चक्र त्रिशूल धरता
जगकर्ता जगहर्ता जगकर्ता जगहर्ता
जगपालनकर्ता || ॐ जय शिव ओंकारा …॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका स्वामी जानत अविवेका
प्रणवाक्षर के मध्यत प्रणवाक्षर के मध्य
ये तीनों एका || ॐ जय शिव ओंकारा …॥

त्रिगुण स्वामीजी की आरती जो कोई नर गावें स्वामी जो कोई जन गावें
कहत शिवानंद स्वामी कहत शिवानंद स्वामी
मनवांछित फल पावें || ॐ जय शिव ओंकारा …॥

ओम जय शिव ओंकारा प्रभू जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा || ॐ जय शिव ओंकारा …॥


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